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कम दुरी के लिए शताब्दी एक्सप्रेस का किराया कम होगा

इंडियन रेलवे कमाई बढाने के लिए तरह तरह की जोर आजमाइश कर रहा है । इसी क्रम में अब सुपरफास्ट ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस से कम दुरी के सफर का किराया घटाया जा रहा है । फाइनैंशल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, रेलवे नही चाहता है कि कम दुरी के यात्री ट्रेन छोडकर सडक के रास्ते यात्रा करें और उसे नुकसान उठाना पडे । भारतीय रेल ने यह फैसला ऐसे हो दो ट्रेनो में इस प्रयोग की सफलता के बाद लिया । दोनो ट्रेनो में कम दुरी की यात्रा के लिए किराया घटाने से रेलवे को जबर्दस्त फायदा हुआ । ऐसा देखा गया है कि शताब्दी ट्रेनो के रुटो पर पडनेवाले ऐसे स्टेशनो पर यात्रियो की आवाजाही बहुत कम होती है, जहां से ट्रेन नहीं खुलती है या उसका सफर खत्म नहीं होता । ऐसी जगहो पर लोग ट्रेनो की बजाय एसी बसो से यात्रा करना पसंद करते है । बीच के इन स्टेशनो के लिए बस का कम किराया यात्रियो को आकर्षित करता है । रेलवे बोर्ड के सदस्य मोहम्मद जमशेद ने फाइनैंशल एक्सप्रेस को बताया, हमने देखा कि एसी बसो ४३० रुपये के करीब चार्ज करती है जबकि शताब्दी का किराया ४७० रुपए के आसपास है । इस वजह से छोटी दुरी के महज ३० प्रतिशत यात्री ही ट्रेनो से सफर करते है । इसके मद्देनजर हमने किराया घटाकर ३५० रुपये करने का फैसला किया और अब करीब करीब सभी १०० प्रतिशत यात्री ट्रेनो से सफर करने लगे । उन्होंने कहा कि अजमेर और जयपुर के बीच एवं चेन्नै और बेंगलुरु के बीच दो स्टेशनो पर हमें पता चला कि एसी बसो का किराया ४३० रुपये है जबकि शताब्दी का ४७० रुपये इसलिए, हमने शताब्दी का किराया घटाकर ३५० रुपये कर दिया और यात्रियो को लुभाने की दिशा में यह बहुत कारगर साबित हुआ । रेल छोड सडक मार्ग अपनाने की बढती प्रवृत्ति इंडियन रेलवे के लिए चिंता की एक बडी वजह है । १९८१ से माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी ६२ प्रतिशत से घटकर ३६ प्रतिशत पर पहुंच गई है । शनिवार को रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि देश में रेलवे को और अनोवेटिव बनाने के लिए कुछ प्रोजेक्ट्‌स का खाका खींचा गया है, लेकिन केंद्रीय मदद के बावजुद फंड की भारी कमी है ।

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