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५० स्ट्रेस्ड लोन अकाउंट्‌स पर सरकार, आरबीआई की नजर

सरकार, रिजर्व बैंक औफ इंडिया और कुछ विजिलेंस एजेंसियो की वोचलिस्ट में ५० स्ट्रेस्ड लोन अकाउंट्‌स है । इस लिस्ट में वीडियोकोन इं़डस्ट्रीज लिमिटेड, जिंदल ग्रुप की कंपनियां जैसे जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, जेपी ग्रुप, लैंको इंफ्राटेक, मोनेट इस्पात, एस्सार लिमिटेड और भुषण स्टील शामिल है । इस लिस्ट में वैसे लोन अकाउंट्‌स शामिल है, जो दिसंबर २०१६ तक बैड लोन हो गए थे या जिनकी रिस्ट्रक्चरिंग हो रही है । इन टोप ५० एकाउंट्‌स में करीब ४-५ लाख करोड रुपये फंसे हुए है, जो सरकारी बैको के कुल बैड लोन का ८०-८५ पर्सेंट है । अप्रैल २०१६ के बाद से सरकारी बैंको का बैड लोन १ लाख करोड रुपये बढकर ३१ दिसंबर तक ६ लाख करोड रुपये पर पहुंच गया था । इनमें से कुछ लोन अकाउंट्‌स मुश्किल में दिख रहे है, लेकिन अभी तक उन्हें सभी बैंको ने एनपीए कैटेगरी में नही डाला है । आरबीआई के फोर्मुले के हिसाब से इनमें से कुछ स्पेशल मेंशन एकाउंट कैटेगरी १ एंड २ में आते है । इसका मतलब यह है कि इन लोन अकाउंट्‌स में ९० दिनो से ब्याज नही चुकाया गया है । नोन परफोर्मिंग एसेट्‌स पर प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने जो प्रेजेंटेशन दिया गया था, इनमें से कुछ नाम की जानकारी उसमें दी गई थी । एक बडे सरकारी अधिकारी ने बताया, बैंको की राय ली गई है और इनमें से कुछ नाम सेक्टोरल स्ट्रेस्ड एसेट्‌स और स्ट्रेस्ड एसेट्‌स बाय वैल्यु दोनो में कोंमन है । उन्होंने कहा कि इस तिमाही में कुछ टेलीकोम कंपनियो के भी इस लिस्ट में आने की आशंका है । टेलीकोम सेक्टर पर काफी कर्ज है और रिलायंस जियो इंकोकोम की एंट्री के बाद जो टैरिफ वोर शुरु हुई है, उससे इन कंरनियो को कर्ज चुकाने में दिक्कत हो रही है । इस महीने की शुरुआत में दो सरकारी बैंको ने वीडीयोकोन इंडस्ट्रीज के लोन को एनपीए कैटेगरी में डाल दिया था । सरकार और आरबीआई एनपीए की प्रोब्लम सुलझाना चाहते है, जो इकनोमिक ग्रोथ की राह में रोडा बना हुआ है । वित्त मंत्री अरुण जेटली कई बार कह चुके है कि बैड लोन की समस्या व्यापक नही है । यह सिर्फ ३०-५० कंपनियो से जुडी है । उन्होंने इस साल अप्रैल में न्युयोर्क यात्रा के दौरान कहा था, ऐसे एकाउंट्‌स की संख्या सैकडो या हजारो में नही है । भारतीय इकनोमी के साइज को देखते हुए इस समस्या को सुलझाना मुश्किल नही है ।

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