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समुद्री जलरक्षक बनकर चीन को बेअसर करने में जुटा भारत

पडोशी मुल्कों को तरजीह देने और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा जाल बिछाने से जुडी पॉलिसी के तहत भारत लगातार काम कर रहा है । बीते हफ्ते दो पडोसियों श्रीलंका और मालदीव को संकट के वक्त भारत की ओर से भेजी गई मॉरीशस के पीएम का भारतीय दौरा भी कूटनीतिक नजरिए से बेहद अहम है । मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में एक अहम देश हैं । इस समुद्री जल क्षेत्र में चीन के प्रभाव बढाने की कोशिशों के बीच केन्द्र की यह रणनीति बेहद मायने रखती है । मॉरीशस और भारत के बीच समुद्री सुरक्षा से लेकर कई अहम मुद्दों पर डील हुई । नेवी के क्षेत्र में मॉरीशस के साथ मजबूत साझेदारी के अलावा भारत श्रीलंका और मालदीव के साथ भी त्रिपक्षीय सुरक्षा संबंधित बातचीत का हिस्सेदार हैं ।
बीते हफ्ते मीडिया की चकाचौंध से दूर भारतीय नेवी मालदीव के शिप एमवी मारिया-३ को बचाने में कामयाब रही थी । यह जहाज तकनीकी खामी की वजह से समुद्र में अनियंत्रित होकर पांच दिनों से बह रहा था । इस शिप पर छह नाविक मौजूद थे । ये बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के नागरिक थे । माले से १५ मई को रवाना होने के बाद इस शिप का संपर्क टूट गया था । इसके बाद मालदीव के कोस्ट गार्ड ने इन्डियन नेवी से मदद मांगी थी । इन्डियन नेवी ने तत्काल अपना टोही विमान मालदीव में तैनात कर दिया । इसका मकसद कोस्ट गार्ड के तलाशी अभियान में मदद करना था । २० मई को इस विमान ने माले के दक्षिण पूर्व में १५० नॉटिकल मील की दूरी पर शिप को ढूंढ निकाला । इस पर सवार सभी क्रू मेम्बर्स सुरक्षित थे । इसके बाद भारतीय जंगी बेडे आईएनएस किर्च को सूचना दी गई, जिसने शिप को वापस खींचकर माले पहुंचाया ।

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