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सहयोगी बैकों के एसबीआई में मर्जर से डरा हुआ है बाजार

मार्च तिमाही में एसबीआई का स्टैंडअलोन परफॉर्मेस अच्छा रहा । बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में मजबूती आई । उसका मुनाफा दोगुना हो गया और एसेट क्वॉलिटी के मामले में भी प्रदर्शन अच्छा रहा । हालांकि इसके बावजूद एसबीआई के शेयर पर दबाव बना हुआ है और शुक्रवार के बाद से इसमें ८ पर्सेट की गिरावट आ चुकी हैं । दरअसल, बाजार को बैंक के कंसॉलिडेटेड रिजल्ट से मायूसी हुई हैं । एसबीआई ग्रुप का नेट प्रोफिट वित्त वर्ष २०१६ के १२२५ करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष २०१७ में २४१ करोड़ रुपये रह गया । इसकी वजह उसके पांच सहयोगी बैंकों का घाटा हैं । हालांकि मार्केट को सिर्फ सहयोगी बैकों से एसबीआई की बैलेंस शीट पर पड़ने वाले दबाव की चिंता ही नहीं सता रही हैं । ईटीआईजी की एक स्टडी से पता चलता है कि सहयोगी बैकों के साथ मर्जर से बैंक की नेटवर्थ, कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो और फ्यूचर प्रोविजनिंग रिक्वायरमेंट पर भी असर पड़ा हैं । सहयोगी बैकों का एसबीआई में मर्जर १ अप्रैल से प्रभावी हो गया हैं । मार्केट का मानना है कि इस वजह से वित्तवर्ष २०१८ में एसबीआई पर दबाव बना रहेगा । एसबीआई ने सहयोगी बैकों के मार्च क्वॉर्टर के मुनाफे की जानकारी नहीं दी हैं । इन बैकों को वित्त वर्ष २०१७ के पहले ९ महीनों में ५९०५ करोड़ रुपये का घाटा हो चुका था । माना जा रहा है कि दिसम्बर क्वॉर्टर में भी उनका घाटा ६००० करोड़ रुपये के करीब रहा था ।जहां एसबीआई की नेटवर्थ में वित्त वर्ष २०१७ में ३० पर्सेट की बढ़ोतरी हुई, वहीं पांच सहयोगी बैकों की कंबाइंड नेटवर्थ १२ पर्सेट यानी ४३५८ करोड़ रुपये घटकर इस दौरान ३१९३४ करोड़ रुपये रह गई । आगे अगर सहयोगी बैकों की इक्विटी में और कमी आती है तो एसबीआई पर उसका असर पडेगा ।

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